Jai Maa Kalyani Seva Samiti

Ram Mandir Marg ,
Civil Lines Allahabad (Prayag) ISO 9001:2015

Deewali Special

pujan kit

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दीपावली पूजन

दीवाली या दीपावली अर्थात रोशनी का त्योहार होता है। यह शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दीवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।

लक्ष्मी पूजन विधि

धन लक्ष्मी :- लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने का पर्व है धनतेरस ।

धन वैभव दात्री धन लक्ष्मी के बारे में ऐसा कहा जाता है, कि एक बार भगवन विष्णु कुबेर से लिए हुए कर्ज को समय पर नहीं चूका पाए तो, धन लक्ष्मी ने ही कृपा कर विष्णु जी को कुबेर से कर्ज मुक्त करवाया था।

पेश है मां लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने वाला मंत्र...। इस मंत्र के मात्र 108 बार जाप करने से देवी मां असीम कृपा प्राप्त होती है और हर प्रकार के आर्थिक संकट दूर होते हैं।

विशेष : इस प्रयोग से लक्ष्मी की अपार कृपा प्राप्त होगी। आर्थिक संकट दूर होंगे। लेकिन मन, उद्देश्य, कर्म और पूजन की शुद्धता तथा पवित्रता अनिवार्य है।

17 अक्टूबर 2017 को दिन मंगलवार प्रदोष काल मुहूर्त शाम 07:34 से 08:26 तक का समय धन तेरस की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा

ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये,
धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।


गज लक्ष्मी :- गज लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने का पर्व है नरकस चौदस।

गज लक्ष्मी पशुधन के संवर्धन की प्रतीक मानी जाती है। पशुधन( गज, अश्व, गौ आदि ) चाहने वालों को गज लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। कहा जाता है कि गज लक्ष्मी ने इंद्र को सागर में डूबे हुए उनके धन को फिर से प्राप्त करने में सहायता की थी।

इस मंत्र के मात्र 108 बार जाप करना चाहिए

19 अक्टूबर 2017 को दिन बृहस्पतिवार प्रदोष काल मुहूर्त शाम 06:59 से 08:02 तक का समय दीपवाली पर माता लक्ष्मी की पूजा के लिये विशेष शुभ रहेगा

गज लक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र :-

"ॐ पहिनी पक्षनेत्री पक्षमना लक्ष्मी दाहिनी वाच्छा,
भूत-प्रेत सर्वशत्रु हारिणी दर्जन मोहिनी रिद्धि सिद्धि कुरु-कुरु-स्वाहा।"


महा लक्ष्मी :- महा लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने का पर्व है दीपावली ।

महालक्ष्मी को आदिलक्ष्मी भी कहते है यह माँ लक्ष्मी का सबसे पहला अवतार है, इन्हे भृगुसुता या भृगु ऋषि की पुत्री के रूप में जाना जाता है।

गज लक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र :-

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥


सन्तान लक्ष्मी :- सन्तान लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने का पर्व है परिया |

संतान लक्ष्मी संतान की देवी हैं। इनकी अर्चना संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले लोग करते हैं। संतान लक्ष्मी के स्वरूप में माँ को गोद में बच्चा लिए दर्शाया गया है। इनके दो हाथ अभय मुद्रा में है, दो हाथ में दो घट है और शेष दो हाथ आयुध लिए हैं|

ॐ श्रीँ ऐं संतानलक्ष्मी पूर्ण सिद्धिं ऐं श्रीँ नमः॥

पूजन सामग्री विवरण

श्रीकुबेरयंत्र - हिन्दू धर्म के अनुसार लक्ष्मीजी को धन व वैभव की प्रतीक (देवी) माना गया है, तथा कुबेर भगवान को माता लक्ष्मी के खजाने का द्वारपाल (रक्षक)। कुबेर भगवान की पूजा का सबसे सरल उपाय कुबेरयंत्र (KuberYantra) को स्थापित कर, उसकी पूजा करना है।

खील / बताशा - शुभ दीपावली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को लगने वाले भोग में सबसे महत्वपूर्ण भोग और भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को सबसे प्रिय भोग है तो वो खील और बताशा का ही भोग है इसलिए भक्त के द्वारा एक बार किसी प्रसाद का भोग न लगे लेकिन इसका भोग लगना अत्यधिक आवश्यक है क्योकि बिना इश भोग के प्रसाद पूरा नही माना जा सकता है |

सिन्दूर -सिन्दूर को ही कुमकुम के नाम से जाना जाता है जो हल्दी, नीबू और हर्बल उत्पाद का बना होता है. सिन्दूर के संबंध में पौराणिक मान्यता के अलावा कुछ वैज्ञानिक कारण भी है. इससे रक्त चाप तथा पीयूष ग्रंथि भी नियंत्रित होती है|

पीली सरसों --पीली राई दिखने वाला एक अति लघु बीज के रूप में हमे दिखाई देने वाला एक छोटा सा बीज है जिसके द्वारा कई तरह के वैदिक अनुष्ठानो के साथ ही साथ तंत्र, मन्त्र, यन्त्र के प्रयोग में भी इसका अत्यधिक महत्व है

कमलगट्टा -कमल गट्टा कमल के पौधे में से निकलते हैं व काले रंग के होते हैं। कमल गट्टे के उपाय से माता लक्ष्मी जल्दी ही प्रसन्न हो जाती हैं।

अष्टगंध -अष्टगंध की सुगंध अत्यंत ही प्रिय होती है। इसका घर में इस्तेमाल होते रहने से चमत्कारिक रूप से मानसिक शांति मिलती है और घर का वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। इसके इस्तेमाल से ग्रहों के दुष्प्रभाव भी दूर हो जाते हैं।

गणेश लक्ष्मी धातु मूर्ति -दिवाली पर प्रथम पूज्य गणेश और धन-धान्य और वैभव की दाता माता लक्ष्मी की पूजा होती है। इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजन के साथ ही लोग अपने आराध्यभगवान गणेश और माता लक्ष्मी

मिट्टी का दीपक -शुभ दीपावली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के सम्मुख मिट्टी का दीपक प्रज्वलित करने से वर्ष भर धन धान्य सुख सम्प्रदा वैभव और लक्ष्मी का वास रहता है और भगवान गणेश की कृपा से कोई बाधा घर में प्रवेश नही करती है

एकादशी नारियल -दीपावली पर जो व्यक्ति लक्ष्मी मूर्ति के समक्ष एकादशी नारियल रखकर उसकी पूजा करता है, उसके जीवन में धन-धान्य का अभाव रह ही नही सकता। इसे सुंघाने मात्र से स्त्री गर्भ के कष्ट से मुक्ति पा लेती है तथा सरलता से प्रसव होता है। जिस घर में यह नारियल होता है वहां तांत्रिक प्रभाव बेअसर होता है। एकादशी नारियल प्राण प्रतिष्ठित, लक्ष्मी मंत्रो से अभिमंत्रित तथा रूद्र मंत्रो से अभिषेशित होना चाहिए।

कनकधारा यन्त्र -यह यन्त्र अत्यंत दुर्लभ, परन्तु लक्ष्मी प्राप्ति के लिए रामबाण है। यह यन्त्र दरिद्रतानाशक एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है। यह अदभुत यन्त्र तुरंत फलदायी है, परन्तु इसकी प्राण प्रतिष्ठा उतनी ही दुःसाध्य है|कनकधारा यंत्र एवं कनकधारा स्त्रोत अत्यंत प्रभावी है और स्वानुभूत है।

गोमती चक्र -गोमती चक्र यह एक पत्थर होता है, जो दिखने में साधारण लगता है लेकिन होता चमत्कारिक है। इस पत्थर का नाम है गोमती चक्र। गोमती नदी में मिलने के कारण इसे गोमती चक्र कहते हैं। गोमती चक्र के घर में होने से व्यक्ति के ऊपर किसी भी प्रकार की शत्रु बाधा नहीं रहती।

नवग्रह लकड़ी -इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के पूजन के साथ ही साथ अगर हम नवग्रह की लकड़ी को देशी घी में भीगा कर उससे दिए गए मंत्रो द्वारा आहुति दे तो हमे और हमारे परिवार पर नव ग्रह की कृपा दृष्टि भी बनी रहती है

कौड़ी -कौड़ी से महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है व धन में बरकत होती है। इन्हीं वस्तुओं में से अति विशिष्ट वस्तु है लक्ष्मी की कौड़ी प्रिय होती है ।

स्वस्तिक पिरामिड -स्वस्तिकपिरामिड को शक्ति, सौभाग्य, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है। घर के वास्तु को ठीक करने के लिए स्वस्तिक का प्रयोग किया जाता है। स्वस्तिक के चिह्न को भाग्यवर्धक वस्तुओं में गिना जाता है। स्वस्तिक के प्रयोग से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती है।

नाग केसर -नागचम्पा की कलि को नागकेसर कहते है|भगवान शिव जी की पूजा में नागकेसर का उपयोग किया जाता है, तांत्रिक प्रयोगों और लक्ष्मी दायक प्रयोगों में भी नागकेसर का उपयोग किया जाता है

सुपारी के गणेश जी -गणेश बुद्धि, ज्ञान और विवेक के साथ धन सुख देने वाले देवता के रूप में भी पूजे जाते है सुपारी वाले गणेश जी विवाह में आने वाले दोषों को दूर कराते हैं। और , आर्थिक प्रगति व समृद्धिप्रदायक है

तुलसी की माला-तुलसी की माला विष्णु, राम और कृष्ण से संबंधित जपों की सिद्धि के लिए उपयोग में लाई जाती है।आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पौधे को चमत्कारी पौधा माना गया है। इससे बनी हुई माला पहनने से व्यक्ति की पाचन शक्ति, बुखार, दिमाग की बिमारियॅा एवम् वायु संबंधित अनेक रोगों में लाभकारी है।

कुबेर पोस्टर -दीपावली के दिन भगवान कुबेर की भी पूजा होती है क्योकि भगवान कुबेर धन के देवता माने जाते है इसलिए इनका भी उतना ही महत्व है जितना माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का है

चावल-सभी प्रकार की पूजा को सफल बनाने के लिए चावल और अर्थात (अछत) का अत्यधिक महत्व है क्योकि इसी अछत के द्वारा सभी देवताओ का आवाहन किया जाता है

गणेश लक्ष्मी सिक्का-दीपावली को इस गणेश लक्ष्मी की छाया प्रति बने हुए सिक्के की विधि पूर्वक दीपावली को षोडशो प्रकार से पूजा करने से घर में गणेश लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है

श्री हनुमान यन्त्र -श्री हनुमान कृपा यंत्र जो व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना चाहता है। उसे प्रतिदिन इस यंत्र का पूजन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों की कुंडली में मांगलिक योग हो, उन व्यक्तियों के लिए इस यंत्र का पूजन करना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। श्री हनुमान कृपा यंत्र के नियमित पूजन से सभी प्रकार की ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

नवग्रह मन्त्र पेज -इस पेज में दिए गए मन्त्रो का बताई गई विधि के अनुसार जप करने से घर में सुख शान्ति धन सम्प्रदा बनी रहती है

अहोई पोस्टर -दीपावली के सायंकाल भक्ति-भावना के साथ दीवार अहोई की पुतली रंग भरकर बनाती हैं। उसी पुतली के पास सेई व सेई के बच्चे भी बनाती हैं। बाजार से अहोई के बने रंगीन चित्र कागज भी मिलते हैं। उनको लाकर भी पूजा की जा सकती है।

पूजन पुस्तिका-इस पूजन पुस्तिका में पूजन से सम्बन्धीत बहुतसी महत्व के लेख अंकित किये गए है

कपूर -कपूर के बिना किसी भी देवी देवता की पूजा अधूरी ही है जप तक कपूर से आरती न की जाये तब तक पूजा पूरी नही मणि जाती है

जनेऊ -किसी भी पूजा में भगवान गणेश को जनेऊ अर्पित करना अति आवश्यक होता है

इत्र -भगवान को फूलो का इत्र भी अर्पित करना पूजा का ही महत्वपूर्ण हिस्सा है

त्रिवेणी संगम जल-भगवान की पूजा में गंगाजल का वही महत्व है जो की शरीर के लिए प्राण का है अर्थात बिना गंगाजल से प्रवित्र किये बिना भगवान को कुछ भी अर्पित नही किया जा सकता है

मिश्री-मिश्री का भोग एक इस तरह का भोग है जिसे की हम पूरी तरह से शुद्ध और फलहारी भी मान सकते है

लौंग, इलायची, सुपारी,-भोग के पश्चात मुख शुद्धी भी पूजन एक महत्वपूर्ण अंग होता है जिसे की कराना अति आवश्यक है क्योकि बिना मुख शुद्धी के भोग पूरा नही माना जाता है

धुप-भगवान को धुप दिखाना भी पूजन का एक अति महत्वपूर्ण अंग है

पीला चन्दन-पीला चन्दन विशेष रूप से भगवान गणेश को अति प्रिय है अत: उनकी प्रसन्नता हेतु उन्हें अर्पित किया जाता है

रोली-इसे भगवान गणेश और माता लक्ष्मी दोनों को अर्पित करने से उनकी कृपा दृष्टी प्राप्त होती है

रुई की बाती-दीपक को प्रज्वलित करने हेतु सबसे शुद्ध और उपयोगी वस्तु है तो रुई की बाती क्योकि रुई की बाती में प्रज्वलित किया गया दीपक पूरी तरह से शुद्ध माना जाता है

हवन सामग्री -पूरे विधि विधान से बनाई गई हवन सामग्री से हवन करना अति सर्वोतम माना जाता है इसे हमे देवी देवताओ का आशीर्वाद तो प्राप्त होता ही है साथ हीओ वातावरण भी पूरी तरह से शुद्ध हो जाता है

चरण पादुका-लक्ष्मी चरण पादुका एक सुनहरा कल्प है। जहाँ जहाँ लक्ष्मी के चरण होंगे वहाँ सुख, समृद्धि का निवास होगा। लक्ष्मी के स्थायी निवास के लिए लक्ष्मी चरण पादुका का विशेष महत्व है। बशर्ते वह अभिमंत्रित, सिद्ध एवं मन्त्रचेतनय युक्त हो। प्राण प्रतिष्ठा के बिना चरण पादुका का कोई महत्व नही। अत: दीपावली की शुभ रात्रि पर विशेष रूप से अभिमंत्रित लक्ष्मी स्वरुप चरण पादुका को अपनी तिजोरी, पर्स या पूजन कक्ष में स्थापित कर लक्ष्मी के स्थायी वास का संकल्प करे।

मौली धागा-मौली धागा अर्थात रच्छासूत्र पूजन के अंत में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद समझ कर इसे अपनी कलाई में बांधा जाता है जिससे ये हमारी सभी प्रकार के कष्टों से हमारी रछा करता है

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